हौसले के आगे हार गया बुढ़ापा, 66 की उम्र में हसमुख भाई ने वो कर दिखाया, देश को देकर गए 9 लाख करोड़ की संपत्ति

हाइलाइट्स

हसमुख ठाकोरदास पारेख ने लेक्चरर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की.
रिटायरमेंट के बाद 1977 में एचडीएफसी की स्थापना की.
1992 में भारत सरकार ने एचटी पारेख को पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया.

Success Story: 9 लाख करोड़ से ज्यादा के मार्केट कैप के साथ एचडीएफसी बैंक भारत का सबसे बड़ा बैंक बन चुका है, लेकिन क्या आप इस बैंक की स्थापना करने वाले शख्स की कहानी जानते हैं. आपको जानकार हैरानी होगी कि किसी जमाने में इस बैंक के फाउंडर मुंबई की एक चॉल में रहते थे. गरीबी के बीच पढ़ाई-लिखाई करके हसमुख ठाकोरदास पारेख ने अपनी मेहनत से बड़ी कामयाबी हासिल की.

बैंकिंग सेवाओं की समझ हसमुख ठाकोरदास पारेख को उनके पिता से मिली थी. हसमुख पारेख मुंबई से ग्रेजुएशन के बाद हायर एजुकेशन के लिए लंदन चले गए. ब्रिटेन से वापस भारत लौटने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की और भारत के सबसे बड़े बैंक HDFC बैंक की नींव रखी.

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पढ़ाई के साथ की पार्ट टाइम जॉब
हसमुख ठाकोरदास पारेख पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब किया. मुंबई से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्हें ब्रिटेन में आगे की पढ़ाई करने का मौका मिला, जहां उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से बैंकिंग और फाइनेंस में बीएससी की डिग्री हासिल की. इसके बाद हसमुख पारेख भारत लौट आए और मुंबई के मशहूर सेंट जेवियर्स कॉलेज में लेक्चरर के रूप में काम किया.

इसके बाद उन्होंने स्टॉक ब्रोकिंग फर्म हरकिसनदास लखमीदास के साथ जुड़कर फाइनेंशियल मार्केट में शानदार करियर की शुरुआत की. आईसीआईसीआई में वे 16 साल के करियर के बाद सेवानिवृत्त होने से पहले उप महाप्रबंधक से अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक तक पहुंचे.

रिटायरमेंट के बाद शुरू किया बैंकिंग कारोबार
66 साल की उम्र में जब लोग सेवानिवृत्ति के बाद घर बसा रहे थे, तब हसमुखभाई ने भारत के मध्यम वर्ग के घर के सपनों को पूरा करने के लिए एक जबरदस्त आइडिया के साथ शानदार वापसी की. उन्होंने 1977 में एक फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के रूप में एचडीएफसी की स्थापना की और 1978 में पहला होम लोन दिया.

1984 तक एचडीएफसी 100 करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक ऋण को मंजूरी दे रहा था. 1992 में भारत सरकार ने एचटी पारेख को पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया. एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक का एक में विलय हो गया, जिससे 14.14 लाख करोड़ रुपये की बड़ी इकाई बन गई.

बता दें कि एचडीएफसी के पूर्व चेयरमैन दीपक पारेख, हसमुख ठाकोरदास पारेख के भतीजे हैं. हसमुख पारेख ने जब इस बैंक की नींव रखी तो उन्होंने दीपक पारेख को लंदन से बुलाकर अपने बिजनेस से जुड़ने के लिए कहा था. कौन जानता था कि हसमुख ठाकोरदास का ये फैसला ऐतिहासिक साबित होगा.

Tags: Billionaires, HDFC, Hdfc bank, Success Story

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