भूल जाएंगे मसूरी और ऋषिकेश, उत्तराखंड की ये जगह बनेगी पर्यटन का हब, भारत सरकार की इस योजना से बदलेगी सूरत

हिमांशु जोशी/पिथौरागढ़. भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की महत्वपूर्ण स्वदेश दर्शन योजना अंतर्गत स्वदेश दर्शन 2.0 में उत्तराखंड के सीमावर्ती दो जनपदों चंपावत और पिथौरागढ़ को शामिल किया गया है. योजना के अंतर्गत पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने और अनेक मूलभूत सुविधाओं के साथ ही इन क्षेत्रों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना है. दरअसल स्वदेश दर्शन 2.0 में शामिल होने के बाद उत्तराखंड के सुदूरवर्ती इन जिलों में पर्यटन के जरिए विकास की मुख्यधारा से यहां के इलाके जुड़ पाएंगे.

बहरहाल, पिथौरागढ़ जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि ये जिला पर्वत, नदियों, झरनों, ऊंची-ऊंची पहाड़ियों से सुसज्जित है. यहां आने वाले पर्यटकों को यही चीज खूब पसंद आती है. स्वदेश दर्शन योजना में फिलहाल गुंजी को शामिल किया गया है, जहां 75 करोड़ की लागत से तमाम पर्यटन के क्षेत्र में विकास कार्य किए जाने हैं.

कभी गुंजी की थी खास पहचान
कभी गुंजी की भारत-तिब्बत व्यापार की मंडी के रूप में विशिष्ट पहचान भी हुआ करती थी, जो कि कैलाश मानसरोवर यात्रा का अहम पड़ाव भी है. इसी इलाके में ओम पर्वत और आदि कैलाश जैसे पवित्र धार्मिक स्थान भी हैं. यहां फिलहाल पर्यटकों के लिए सुविधाएं सीमित ही हैं. स्वदेश दर्शन में शामिल होने के बाद सीमांत के इस इलाके की तस्वीर बदलने की उम्मीद है. पिथौरागढ़ के स्थानीय निवासी इंद्र लुंठी ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे गुंजी और पिथौरागढ़ जिले को विश्व में एक नई पहचान मिलेगी.

पिथौरागढ़ के पर्यटन अधिकारी ने कही ये बात
पिथौरागढ़ के पर्यटन अधिकारी कीर्ति आर्य ने जानकारी देते हुए कहा कि स्वदेश दर्शन 2.0 में पिथौरागढ़ के उन स्थानों को भी चिन्हित किया जा रहा है, जहां पर्यटन की संभावनाएं अधिक हैं. उन्होंने कहा कि इसकी डीपीआर तैयार की जा रही है जिसके बाद स्पष्ट जानकारी उपलब्ध हो जाएगी. बता दें कि भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना में पर्यटन स्थलों का चयन किया जाता है जहां पर पर्यटन विकास से सम्बंधित सभी चीजों का विस्तार करने के साथ ही उस इलाके के विकास पर ध्यान दिया जाता है. किसी भी क्षेत्र में पर्यटन विकास के लिए वहां की कनेक्टिविटी और हॉस्पिटैलिटी का विकसित होने जरूरी होता है. इस योजना से जुड़ने के बाद पर्यटन की संभावनाएं लिए सीमांत के इलाके बेहतर कनेक्टिविटी से जुड़ेंगे. साथ ही इन इलाकों में टूरिस्ट के रुकने के लिए सुविधाओं का भी विस्तार होगा.

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