धान-गेहूं के चक्कर छोड़, अमरूद उगाने चला किसान, बंपर मुनाफे के फेर में डूब गए 5 लाख रुपए

टोहाना. हरियाणा में एक तरफ गिरते भू-जलस्तर से सरकार परेशान है और किसानों को धान-गेहूं छोड़कर कम पानी वाली फसलों, खासकर बागवानी करने की सलाह दे रही है. वहीं दूसरी ओर जिन किसानों ने सरकारी सलाह पर बागवान बनने की राह पकड़ी, वे मंडी में अपनी फसलों के दाम न मिलने से परेशान हो रहे हैं. बंपर मुनाफे के फेर में किसानों को लाखों का नुकसान हो रहा है. फसलों के उचित दाम न मिलने और तगड़ा घाटा सहने वाले किसानों के सामने ऐसे में बाग उखाड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं दिख रहा.

किसानों को क्यों हुआ नुकसान

  • टोहाना क्षेत्र के किसान राज सिंह व विनोद का कहना है कि रेट अच्छे मिले और फसल की डिमांड बने, तो बागवानी मुनाफा देती है. यही सोचकर उन्होंने भी इस ओर रुख किया.
  • इन किसानों ने 5 एकड़ फसल में अमरूद का बाग लगा दिया. बाग में जब फसल तैयार हुई तो अब फसल के दाम ही नहीं मिल रहे हैं.
  • किसानों का कहना है कि मंडी में 7-8 रुपये प्रति किलो भाव मिल रहा है. इतने में तुड़ाई, छंटाई का भी खर्चा नहीं निकल पाता है.
  • फसल की बिक्री न होने से बाग में ही फल पेड़ों पर लगे हुए हैं और नीचे गिर-गिर कर खराब हो रहे हैं.
  • किसानों का कहना है कि उन्हें 5 एकड़ का सालाना 5 लाख रुपये का नुकसान हो गया है.

बाग उखाड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं दिख रहा
टोहाना के किसान बंधु राज और विनोद का कहना है कि यदि फसल की लागत भी ऊपर नहीं हुई, तो उनके सामने बाग उखाड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा. उन्होंने कहा कि ठीक है बाग लगने से पर्यावरण संरक्षण होता है, पानी की बचत होती है. कई जगहों पर किसानों को मुनाफा भी होता है, लेकिन हर किसान के साथ ऐसा नहीं होता. सरकार के कहने पर जो किसान बाग लगा रहे हैं, कम से कम सरकार उन्हें उस फसल के अच्छे दाम तो दिलवाए, ताकि किसानों को फायदा हो. इससे किसान दूसरी फसल लगाने के बारे में भी सोचेगा.

Tags: Farmer, Tohana News

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